"ज़ालिम ज़िन्दगी"
ऐ जिन्दगी तू मुझ पे कभी मेहरबान ना हुई, दर्दे दिल दिये इतने कि दवा ना हुई...हमने हर मोड़ पेशिद्दत से चाहा तुझे मनाना, मगर ऐ जिन्दगी तू मुझसे ख़फा ही रही...ज़ालिम ज़िन्दगी अब और ज़ुल्म ना कर, हम चले जायेंगे तेरा जहां छोड़ कर, इस पर भी तू कभी शर्मिन्दा ना हुई
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| Sad Shayari in Hindi |
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